Some of The Best Sahir Ludhianvi Shayaris And Some More


If I am understanding it right,there was some earliest Punjabis who started writing for the industry were fully conversant with Hindi/Urdu and also in poetry. They were able to write according to demand of the film industry but Sahir Ludhianvi (1921-1980) was the man who completely change the song-writing and created a new style of film songs and today I devote this article to his contribution. After the death of Anand Bakshi now only Gulzar remains from among the Punjabi song-writers in film industry.

Sahir won a Filmfare Award for Best Lyricist for Taj Mahal (1963). Again he won his second Filmfare Award for Kabhi Kahbi (1976) He also awarded the padma Shri in 1971.

Famous Songs Penned By Sahir Ludhianvi
  • Jo Wada Kiya
  • Neele Gagan Ke Tale
  • Main Zindagi Ka Sath Nibhata Chala Gaya
  • Kabhi Kabhi Mere
  • Abhi Na Jao ChhordKar
  • Sar Jo Tera ChakRaye
  • Ude Jab Jab
  • Tum Agar Saath Dene Ka Wada Karo
  • Keh Du Tumhe
  • Ye Dil Tum Bin Lagta Nahin
  • Aye Meri Johrazabeen
  • Aaja Tujhko Pukare Mera Pyaar
  • Main Pal Do Pal Ka 

Shayaris Written By Sahir Ludhianvi 
(And If You Get Some feelings while reading Plz Don't Prevent Yourself From Sharing it)

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा
इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा

जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है
बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा

दुनिया की निगाहों में बुरा क्या है भला क्या
ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा

वैसे तो तुम्ही ने मुझे बर्बाद किया है
इल्ज़ाम किसी और के सर जाए तो अच्छा
  वह कुछ मुस्कुराना, वह कुछ झेंप जाना,
जवानी अदाएं सिखाती है क्या-क्या
वह अफसाना जिसे अंजाम तक, लाना न हो मुमकिन
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर, छोड़ना अच्छा
पास जायें तो होश खो बैठें
दूर रहिए तो जाँ पै बनती है
फिर न कीजे मेरी गुस्ताख निगाहों का गिला
देखिये अपने फिर प्यार से देखा मुझको
While I was writing this post, lots of other Shayaris came to my mind, But these shayaris written by some other great writers and I couldn't resist myself from sharing it. 
I often use them at the right place and moment, whenever I can't able to describe my feelings at the specific time.
Jaun Eliya Credit-Flickr
Shayaris Written By Jaun Eliya
(And If You Get Some feelings while reading Plz Don't Prevent Yourself From Sharing it)

ख़ूब है इश्क़ का ये पहलू भी
मैं भी बर्बाद हो गया तू भी

उस के होंटों पे रख के होंट अपने बात ही हम तमाम कर रहे हैं
उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं 
तेग़-बाज़ी का शौक़ अपनी जगह
आप तो क़त्ल-ए-आम कर रहे हैं
 
यूँ जो तकता है आसमान को तू
कोई रहता है आसमान में क्या 
कितने ऐश उड़ाते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे 
नया इक रब्त पैदा क्यूँ करें हम
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम 
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं 
ये काफ़ी है कि हम दुश्मन नहीं हैं
वफ़ा-दारी का दावा क्यूँ करें हम 
हम हैं मसरूफ़-ए-इंतिज़ाम मगर
जाने क्या इंतिज़ाम कर रहे हैं 

हम वो है जो खुदा को भूल गए ,
तू मेरी जान किस गुमान मैं है
ख़ूब है शौक़ का ये पहलू भी
मैं भी बर्बाद हो गया तू भी


ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था क्या जहान में 



Shayaris Written By Bashir Badr
(And If You Get Some feelings while reading Plz Don't Prevent Yourself From Sharing it)


उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाये

ज़िन्दगी तूने मुझे कब्र से कम दी है ज़मीं
पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है

पलकें भी चमक जाती हैं सोते में हमारी,
आँखों को अभी ख्वाब छुपाने नहीं आते 

मैं इतना बदमुआश नहीं, यानि खुल के बैठ
चुभने लगी है धूप तो स्वेटर उतार दे

अजीब शख़्स है नाराज़ होके हंसता है
मैं चाहता हूँ ख़फ़ा हो तो वो ख़फ़ा ही लगे

उन्ही रास्तों ने जिन पर कभी तुम थे साथ मेरे
मुझे रोक रोक पूछा तेरा हमसफ़र कहाँ है

कितनी सच्चाई से मुझ से ज़िंदगी ने कह दिया
तू नहीं मेरा तो कोई दूसरा हो जाएगा

मुझसे बिछड़ के ख़ुश रहते हो
मेरी तरह तुम भी झूठे हो
तुम तन्हा दुनिया से लड़ोगे
बच्चों सी बातें करते हो

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा 
कश्ती के मुसाफ़िर ने समुंदर नहीं देखा 

ख़त ऐसा लिखा है कि नगीने से जड़े हैं 
वो हाथ कि जिस ने कोई ज़ेवर नहीं देखा 

पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला 
मैं मोम हूँ उस ने मुझे छू कर नहीं देखा

उसे पाक नज़रों से चूमना भी इबादतों में शुमार है
कोई फूल लाख क़रीब हो कभी मैं ने उस को छुआ नहीं कभी 

मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा
मुझे मालूम है क़िस्मत का लिक्खा भी बदलता है

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला 

ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं
पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है




Shayaris Written By Rahat Indori
(And If You Get Some feelings while reading Plz Don't Prevent Yourself From Sharing it)

दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए 

कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया
इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया

अफवाह थी की मेरी तबियत ख़राब हैं
लोगो ने पूछ पूछ के बीमार कर दिया

रातों को चांदनी के भरोसें ना छोड़ना
सूरज ने जुगनुओं को ख़बरदार कर दिया

रुक रुक के लोग देख रहे है मेरी तरफ
तुमने ज़रा सी बात को अखबार कर दिया

इस बार एक और भी दीवार गिर गयी
बारिश ने मेरे घर को हवादार कर दिया

बोल था सच तो ज़हर पिलाया गया मुझे
अच्छाइयों ने मुझे गुनहगार कर दिया

हम अब मकान में ताला लगाने वाले हैं
पता चला है के मेहमान आने वाले हैं 
एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो
घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है
मेरी ख़्वाहिश है कि आँगन में न दीवार उठे
मेरे भाई मेरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
ये हवाएँ उड़ा न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन
दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो 

ये कुछ लोग फरिस्तों से बने फिरते हैं
मेरे हत्थे कभी चढ़ जाये तो इन्सां हो जाए
वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा
मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया
न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा
गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या-क्या है
मैं आ गया हूँ बता इन्तज़ाम क्या-क्या है 

ये सहारा जो न हो तो परेशां हो जाए
मुश्किलें जान ही लेले अगर आसान हो जाए

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो 

दुनिया में हूँ दुनिया का तलबगार नहीं हूँ
बाज़ार से गुज़रा हूँ, ख़रीददार नहीं हूँअकबर इलाहाबादी

इसी में इश्क़ की किस्मत बदल भी सकती थी,
जो वक़्त बीत गया मुझ को आज़माने में क़ैफ़ी आज़मी

पेड़ काटने वालों को ये मालूम तो था 
जिस्म जल जायेंगे जब सर पे न साया होगा - क़ैफ़ी आज़मी

ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है - तहज़ीब हाफ़ी